बचपन में स्कूल से बार-बार निकाल दिये जाने के बावजूद भी कैसे बने Mr. Perfectionist ?

यह जरूरी नहीं हैं कि Mr.Perfectionist बनने  के लिए Perfect Environment की जरूरत होती है। पढ़ाई के बीच  स्कूल से निकाल दिया जाना, कभी भूखे सोना, पिता की हर बार नाकामयाबी के खबरें आना, यह सब कुछ सहना पड़ा था, Mohammad Aamir Hussain Khan को। चौकिए मत !! मैं बात कर रहा हूँ चॉको बॉय Aamir Khan की। जिन्हें Bollywood में आने से पहले अपने नाम को छोटा करना पड़ा था। पर उन्होंने बचपन में हर उस Problem को Face किया है,जो एक गरीब परिवार के बच्चे के सामने आता है। तो Friend अब आप इस Hindi Biography द्वारा जानेंगे Aamir Khan की Life History

aamir khanAamir Khan Hindi Biograhy (Wiki)

Childhood & Family

आमिर खान का जन्म मुंबई में हुआ था। उनके पिता ताहिर हुसैन एक Film Producer थे, जितना वे अपने काम की असफलता से परेशान रहते थे, उससे ज्यादा आमिर चिंतित रहते थे, क्योंकि पिता की Business Failure की वजह से Financial level ठीक न थी, जिसके कारण उनके ऊपर हमेशा बिना फीस के कारण स्कूल से निकाले जाने का खतरा मँडराता रहता था।

उनकी माँ ज़ीनत हुसैन एक Housewife थी, जो बनारस से थी। उनकी एक Step Mother भी थी, शहनाज हुसैन। चार भाई-बहनों में वे सबसे बड़े हैं, उनका एक भाई Faisal Khan, है, जो Actor भी हैं।

वैसे वे मूलरूप से शाहबाद, हरदोई के नजदीक, UP से हैं, जहां उनके Grandfather का आमों का बगीचा था। इसके अलावा उनका कनेक्शन मौलाना अबुल कलाम आजाद से भी हैं, क्योंकि उनकी Grandmother आजाद की भतीजी थी।

Student Life

उन्होंने अपनी पढ़ाई जे.बी. पेटिट स्कूल से स्टार्ट किया, पर कुछ दिनों बाद ही उस स्कूल को बदल कर संत एन हाई स्कूल, बांद्रा में 8वीं तक पढ़ाई की। नवीं और दसवीं क्लास को बॉम्बे स्कोटिस स्कूल, माहिम से पूरा किया। स्कूल के दिनों को याद करते हुए वे कहते हैं,

फीस ड्यू होने के कारण मेरा और मेरे भाई का नाम स्कूल के नोटिस बोर्ड पर लिख दिया जाता था, कभी-कभी तो यह छह महीनों तक यू ही लिखा रहता था। माँ स्कूल के uniform बड़े-बड़े साइजों में सिलाती थी, ताकि वह लंबे समय तक चल सके।

उनके बीते जीवन का सबसे बुरा दौर Locket Film के निर्माण के समय था, जब उनके पिता को उस फिल्म बनाने में 8 साल लगे, जिसके कारण उनके परिवार का Financial स्तर पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुका था। बरहाल उनका जीवन समुंद्री लहरों पर पड़े अर्ध-मरी मछली के समान चलती रही।

वे स्कूल के दिनों में पढ़ाई से ज्यादा खेलों में इंटेरेस्टेड थे, जिसके कारण वे टेनिस में स्टेट लेवल चैंपियन भी रह चुके हैं। आगे उन्होंने इंटर्मीडियट Narsee Monjee College, Mumbai से किया।

 

Little Aamir Khan’s Bollywood Debut under Parents

अधिकतर रिश्तेदारों का Bollywood में होने के कारण वे बॉलीवुड से अछूता नहीं थे। उन्होंने 8 साल की उम्र में 1973 के जमाने में Popular Song “यादों की बारात” में काम किया, जिसे उनके अंकल नासिर हुसैन द्वारा निर्देशित किया गया। उसी साल उन्हें अपने पिता के प्रोड्यूसिंग में “मदहोश” फिल्म में महेंद्र संधु की भूमिका निभाने का मौका मिला, जो उनकी 1st Movie थी।

पैरेंट्स चाहते थे कि उनका बेटा पढे और डॉक्टर या इंजीनियर बने। पर पिता के असफलतायों ने उन्हें Mature कर चुका था।उन्होंने 16 साल की उम्र में “परनोईया” नाम की 40 मिनट की साइलेंट फिल्म में काम किया, जिसे उनके बचपन के दोस्त अदित्या भट्टाचार्य द्वारा निर्देशित किया गया।

इसके बाद उन्होंने अपने अभिनय के कला को निखारने के लिए अवांतर नाम के थियेटर ग्रुप को ज्वाइन कर लिया। जहां वे एक साल तक रहे और उन्होंने अपना स्टेज डेब्यु पृथ्वी थिएटर में “केसर बिना” नाटक से किया। अब वे पूरी तरह से नाटक मंडली में बस चुके थे, सो उन्होंने 12 वीं की पढ़ाई सदा के लिए छोड़ दी।

Real Bollywood Debut (Filmography)

1984 में उन्हें India में Student पर होने वाले Ranging पर आधारित Movie “होली” में काम करने का मौका मिला, जिसे उन्होंने झट-से हाँ कर दिया, क्योंकि उन्हें पहली बार अपने परिवार के छत्रछाया से बाहर निकल कर काम करने का जो मौका मिला रहा था। उनका मानना है,

हर कामयाब आदमी की शुरुआत कमफर्ट जॉन से बाहर निकलने के साथ ही हो जाती है।

इस Movie में उनका गज़ब का समर्पण भी दिखा, जिसके कारण उनके परफ़ोर्मेंस की प्रशंसा India से लेकर America तक हुई। The New York Times ने लिखा,

Non-Professional लोगों द्वारा Professional काम किया गया।

अगली Movie “कयामत से कयामत तक (1988)” के लिए उनके अंकल ने उन्हें मेन रोल के लिए कास्ट कर लिया, जिसमें Juhi Chawla भी थी। यह फिल्म सुपर-ड्यूपर हिट रही। इस फिल्म की सफलता की गूंज Filmfare Awards में भी गूंजी। इस फिल्म ने कुल 7 Film Fare awards बटोरे और कठिन परिश्रम और उम्दा एक्टिंग के लिए उन्हें Best Male Debut का अवार्ड भी मिला। यानि Commercial Success के तौर पर उनका Debut Film रहा।

एक बार और उन्हें 1989 में अपने बचपन के दोस्त अदित्या भट्टाचार्य की फिल्म “राख” में काम करने का मौका मिला। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुस्त रही। पर इस फिल्म ने उन्हें National Film Award जरूर दिला दिया। इस अवार्ड ने पूरी बॉलीवुड की आँखों का फोकस उनपर कर दिया। जिसके कारण उन्हें 1990 में पाँच Movies मिली। पर वे Quantity के चक्कर में Quality का ध्यान न रख सके और Unsuccessful Movies की लंबी कतार लग गई। जो “Love Love Love,” से स्टार्ट हुई, “अवल नंबर”, “तुम मेरे हो, दीवाना मुझ सा नहीं”, से होते हुए “जवानी जिंदाबाद” पर जाकर खत्म हुई।

सफलता का दौर

जल्द ही समय बदला। और अगली बैक टू बैक दो फिल्में “दिल” और “दिल है की मानता नहीं” सफल रही। इस तरह हॉलीवुड की फिल्म “It Happened One Night”, “जो जीता वही सिकंदर”, “हम है राही प्यार के”, “रंगीला”, “अंदाज़ अपना अपना” फिल्में काफी सफल रही।

इसके बाद वे क्वालिटी पर ध्यान देने लगे, यही वजह रही उन्होंने 1996 में एक ही फिल्म किया। जिसके गाने और कहानी हर भारतीय की जुबां पर रहती थी। बचपन में जिसके एक गाने को मैं अपनी तुतली आवाज में खूब गया करता था।  “पल-देशी पल-देशी, जाना नहीं मुझे छोड़ के” जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ BlockBuster “राजा हिंदुस्तानी” की। जिसमें करिश्मा कपूर, जॉनी लीवर भी थे। इस फिल्म के लिए उन्हें Filmfare Best Actor Award भी मिला।

1997 में उन्होंने “इश्क” में अजय देवगन, काजोल और जुही चावला के साथ काम किया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ठीक-ठाक रही।

वे केवल एक्टिंग में ही माहिर नहीं हैं, बल्कि सिंगिंग में भी अच्छा-खासा जौहर दिखाने का दम रखते हैं। इसका सबूत है कि उन्होंने अपने अगले फिल्म ग़ुलाम में Playback Singing की भूमिका निभाया।

1999 में आई फिल्म “सरफरोश” सफल रही और पहली बार उन्होंने अपने भाई Faisal Khan के साथ मेला फिल्म में काम किया। जो उनकी अगली मिलेनियम फिल्म साबित हुई। इसी तरह 2001 में बहूप्रतीक्षित फिल्म लगान आई, जो Cricket पर आधारित थी। इस फिल्म ने कई अवार्ड्स बटोरे और साथ ही उन्हें भी दूसरा Filmfare Best Actor Award भी मिला।

फिर इस दिलदार एक्टर ने 2001 में डाइरेक्टर के रूप में डेब्यु कर रहे फरहान अख्तर की फिल्म “दिल चाहता है” के लिए काम किया, जिसके लिए इस फिल्म को Best Film Critics Award भी मिला।

पर उस समय उनकी पत्नी रीना दत्ता (First Wife) से तलाक हो गया और वे चार सालों के लिए बॉलीवुड की दुनिया से गुम हो गए।

पर्फेक्ट बॉलीवूड वापसी

2005 में उन्होंने “मंगल पांडे” फिल्म से बॉलीवूड में धाकड़ वापसी की। अब तक भगत सिंह पर बनी फिल्मों को क्या हश्र हुआ था, सब जानते थे। फिर भी उन्हें “रंग दे बसंती” की स्क्रिप्ट पसंद आई और बड़ा जोखिम लेते हुए इस फिल्म को सफलतापूर्वक पूरा किया। और यह उनका ही काम के प्रति बेइंतिहा मोहब्बत और संपर्ण का ही परिणाम था कि यह फिल्म उनकी सफलतायों के ब्रह्मांड में चमकता तारा निकला। अवार्ड्स भी बहुत दीवाने हुए यहाँ तक की ऑस्कर भी दिल बैठा पर अंत में इंजहार ना कर सका।

अब सफलता उनपर इतनी मेहरबान थी कि उनके राहों में कभी चमेली, कभी गुलाबों के फूलों का सेज बिछाते जा रही थी।

2006 में काजोल के साथ आई शायरी वाली फिल्म “फना”, 2007 में Dyslexia पर आधारित फिल्म “तारे जमीन पर” (जो उनका डाइरेक्टर के रूप में डेब्यु फिल्म भी था, जिसके लिए Filmfare  Awards for Best Director और Best Film  of 2007 भी मिला। ), 2008 में “गजनी”, 2009 में “थ्री इडियटस” जैसे Movies उनके ब्रह्मांड की बड़े तारे थे। पर अभी भी सूरज का इंतजार था।

उनके सफलता के ब्रह्मांड में जल्द ही एक नहीं, दो-दो सूरज उगने वाला था, जो एक उगा 2013 में “Dhoom3” के नाम से, दूसरा 2014 में “PK” के नाम से। इन दोनों फिल्मों ने रिकॉर्डतोड़ 500-500 करोड़ रुपये की ऊंची कमाई कर उनकी ऊंच कोटी के मार्केटिंग क्षमता और एक्टिंग से दुनिया को एक बार फिर परिचित कराया।

Production Company

प्रोड्यूसर के रूप में पिता की अफलतायों और फिल्मी जिंदगी के थपेड़ो ने उन्हें बहुत कुछ सीखा दिया। इसलिए उन्होंने 2001 में Aamir Khan Productions के नाम से प्रॉडक्शन कंपनी बनाई। जिसकी First Movie लगान थी।

अब वे फिल्मों के लेकर इतना संजीदा हो गए थे कि जिस फिल्म से उनकी आत्मा नहीं जुड़ती थी। वे उस फिल्म को नहीं करते थे। यहीं कारण है कि उनकी प्रॉडक्शन कंपनी ने 10 वर्षों में मात्र 7 ही फिल्में बनाई हैं। उनके प्रॉडक्शन कंपनी की बेहतरीन फिल्में “तारे जमीं पर”, “जान तू… या जाने ना” “धोबी घाट” “तलाश” रही। उन्होंने अपनी कंपनी के द्वारा अपने भतीजे Imran Khan को भी लांच किया।

Aamir Khan की मुहिम Satymeva Jayate

2011 में उन्होंने सत्यमेव जयते धारावाहिक से टेलीविज़न के पर्दे डेब्यु किया। इस शो से उनका जुडने का कारण इस शो के निर्देशक और बचपन के दोस्त सत्यजित भटकल थे।

सत्यजीत और वे दोनों स्कूली दोस्त रहे हैं। कॉलेज में आने के बाद सत्यजीत कानून के जानकर बन लोगों की मदद करते थे। इस दौरान वे एक्टर बन गए। पर जब भी वे सत्यजीत को लोगों की मदद करते देखते तो उन्हें भी लोगों की मदद करने की इच्छा होती थी। हालांकि वे डोनेशन भी देते थे। पर वे इससे संतुष्ट नहीं थे।

इसी बीच उन्हें लगा कि टेलीविज़न पर एक ऐसा शो करते है, जिससे लोगों की परेशानी कम हो पाये। इसकारण उन्होंने सत्यमेव जयते जैसे सोशल शो को किया।

आखिर आमिर खान क्यों है ? Mr. Perfectionist

आमिर खान हमेशा सेट पर एक ब्लू डायरी रखते है, जिसमें वे अपना डायलोग्स लिखकर याद करते है। यानि शॉट से पहले ही अच्छी ख़ासी होम वर्क कर लेते है। जिस कारण अधिकांशत: वे पहले ही शॉट में पर्फेक्ट शॉट दे देते है।

एक बार जब फरहान अख्तर ने अपनी फिल्म “दिल चाहता है” के स्क्रिप्ट में कुछ बदलाव कर दिये थे, जिसे किसी ने पकड़ न सका, सिवाय आमिर खान के।

वे किसी भी फिल्म से जुडने से पहले अपना ही फायदा नहीं देखते, बल्कि वे एक सामाजिक नजरिया का Use करते हुए समाज के फायदे के बारे में भी सोचते है। और वे अपनी माँ की तरह अपने निर्णय और उद्देश्य पर अडिग रहते है।

पिता की प्रोड्यूसिंग स्किल ने उन्हें बेहतर मार्केटिंग का गुण सिखाया, जिसके बलबूते आज जिस फिल्म को हाथ लगाते है, वह फिल्म 500 करोड़ से कम नहीं कमाती है।

अब वे अपने काम को हमेशा समाज की तराजू में तौलते है, जिसके कारण वे ऐसा-वैसा एड नहीं करते है, जिसमें उन्हें आम-जन से झूठ बोलना पड़ा। रही बात उनका खेलों के प्रति लगन का, उनका एक ही सिद्धांत है

आप चाहेंगे कि मैं कोई Sport Team खरीदूँ और उसे एक महीने तक रोज 4 घंटे का समय दूँ। यह मेरे लिए संभव नहीं। हाँ मैं उनके साथ खेल सकता हूँ।

बिलकुल यही बात उन्हें अन्य एक्टर से अलग बनाता है। वे अच्छी तरह से टेनिस खेल सकते है। इसके अलावा उन्होंने अपने Direction का लौहा “तारें जमीं पर” फिल्म की सफलता से मनवा चुके है। Singing, Harmonium बजाना, उनका शोक है। पर बेहतरीन स्किल के मालिक है।

Personal Life & Marriage

आमिर खान चेहरे से जितना सरल दिखते है, उससे ज्यादा आम जीवन में सरल और सुलझे हुए इंसान है। हाँ 2001 में अपनी First Wife Reena Dutta के साथ रिश्तों को लेकर चिंतित रहे और सदा के लिए अलग भी हो गए। पर वे अलग हुए केवल अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि इसमें उनके Children Ira Khan (Daughter) और Junaid Khan (Son) की भी इच्छा शामिल थी।

2005 में उन्होंने किरण राव से शादी की। Kiran Rao बताती है,

वे अपनी माँ के बहुत करीब है। हमेशा अपने पर्स में माँ की फोटो रखते है। और चाहे वे कितने ही टाइट शेड्यूल में फंस गए हो। वे त्योहारों पर अपनी माँ के लिए टाइम निकाल ही लेते है।

वे खुद इस बात स्वीकारते हुए कहते है

हाँ ! मैं अम्मी के सबसे करीब हूँ। मैं उनके सोच और उनके समान हूँ। वो जो भी ठानती है, करके ही छोड़ती है। मैं भी यहीं करता हूँ।

मार्च, 2015 को उन्होंने अपनी पत्नी किरण राव से इंसपायर्ड होते हुए None – Vegetarian Food को छोड़ Vegetarian Food को सदा के लिए अपना लिया।

Aamir Khan’s Awards

National Film Award-Special Jury Award
Filmfare Award for Best Actor
Filmfare Critics Award for Best Actor
Filmfare Award for Best Director
Filmfare Award for Best Male Debut
IIFA Award for Best Actor
screen Award for Best Actor
Screen Award for Best Supporting Actor
Screen Award for Best Director
Producers Guild Film Award for Best Director
Zee Cine Award for Best Actor-Male
Zee Cine Award for Best Director
Padma Shri Award

कुछ सवाल-जवाब

Nickname – Choko Boy, A Man With the Golden Touch, Mr. Perfectionist

पसंद – बेहतर कार्य के लिए सर्च करना

नापसंद – करप्शन, झूठेबाज़

Hobbies– पुराने गाना सुनना, क्रिकेट देखना, सोशल वर्क करना

Education Qualification – इंटर्मीडियट पास

Favorite Actors – गोविंदा, लियोनार्डो डिकपरिओ, डेनियल दे लुईस

Favorite Actress – गीता बाली, वाहीदा रहमान

Favorite Movies – प्यासा

Favorite Color – Black

Favorite Sports – Tennis, Cricket

प्रति फिल्म कमाई – 60 करोड़ रुपये

क्या वे स्मोक करते है ? – अब नहीं, पहले वे एक दिन में 40 सिगरेट पी जाते थे।

क्या वे एल्कोहोल लेते है ? – हाँ

कुछ चटपटी बातें

  • वे मुश्किल से ही नहाते है। केवल त्योहारों में ही शरीर स्नान करते है।
  • 1990 के बाद से उन्होंने Award Function में जाना छोड़ दिया, केवल इस बात को लेकर की फिल्म “दिल” के लिए उन्हें Best Actor का अवार्ड मिलने वाला था, पर फ़ाइनल रिजल्ट में फिल्म “घायल” के लिए सनी देयोल को दे दिया गया।

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About the Author: Ravi Kumar

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